बेलसंड का ऑक्सीजन प्लांट दो सालों से धूल फांकने को मजबूर

बेलसंड का ऑक्सीजन प्लांट दो सालों से धूल फांकने को मजबूर

0

बेलसंड: कोरोना महामारी की भयावहता और ऑक्सीजन की मारामारी के बीच जिस प्लांट ने दर्जनों जिंदगियों की सांसें बचाई थीं, आज वही ऑक्सीजन जनरेटिंग प्लांट खुद वेंटिलेटर पर है। अनुमंडलीय अस्पताल बेलसंड में स्थापित यह ऑक्सीजन प्लांट पिछले दो वर्षों से उचित रखरखाव के अभाव में पूरी तरह बंद पड़ा है। नतीजतन, लाखों रुपये की लागत से बनी व्यवस्था अब केवल शो-पीस बनकर रह गई है। गौरतलब है कि कोरोना काल के दौरान जब चारों तरफ ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा हुआ था, तब ब्रेवो एरिजिट कंपनी ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए यह प्लांट अनुमंडलीय अस्पताल को डोनेट किया था। इस प्लांट की उत्पादन क्षमता 400 लीटर प्रति मिनट थी। प्लांट के चालू होने के बाद सेअस्पताल के सभी 50 बेडों तक पाइपलाइन के जरिए सीधे ऑक्सीजन पहुंचाने की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। इससे न केवल बेलसंड, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बहुत बड़ी राहत मिली थी। स्थापना के बाद यह प्लांट कुछ वर्षों तक सुचारू रूप से चला, लेकिन समय के साथ प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गया। उचित देखरेख और समय पर सर्विसिंग न होने के कारण प्लांट के कंप्रेसर में खराबी आ गई और धीरे-धीरे पूरी मशीनरी ठप पड़ गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लगभग दो साल पहले सरकार द्वारा इस प्लांट को संचालित करने वाले टेक्नीशियन को भी हटा दिया गया। तब से लेकर आज तक न तो मशीनों की मरम्मत कराई गई और न ही किसी नए ऑपरेटर की तैनाती हुई। नतीजतन, करोड़ों का इंफ्रास्ट्रक्चर जंग खा रहा है और सभी 50 बेडों पर बिछाई गई पाइपलाइन बेकार साबित हो रही है। वर्तमान में अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को यदि ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, तो उन्हें पारंपरिक सिलेंडरों के भरोसे रहना पड़ता है या फिर आपात स्थिति में सीतामढ़ी सदर अस्पताल अथवा मुजफ्फरपुर रेफर कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस प्लांट को आपदा के समय इतनी तत्परता से शुरू किया गया था, उसे आम दिनों में चालू रखना स्वास्थ्य विभाग के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। लेकिन विभाग की लापरवाही ने आम लोगों से यह सुविधा छिन ली।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

Advertisement